धनबाद: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईएसएम) धनबाद द्वारा आदिवासी छात्रों के लिए चलाए जा रहे एक वर्षीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत झारखंड के विभिन्न एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) में 28 से 30 अप्रैल तक एंड-सेमेस्टर परीक्षा आयोजित की जा रही है। यह पहल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल वेलफेयर के माध्यम से जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से संचालित की जा रही है।
इस परीक्षा के दौरान छात्रों की डिजिटल स्किल्स का मूल्यांकन थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों माध्यमों से किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 1 जुलाई 2024 से शुरू हुआ था और राज्य के सात EMRS स्कूलों—काठीजोरिया (दुमका), तसरिया (गोड्डा), भोगनाडीह (साहिबगंज), कुजरा (लोहरदगा), बसिया (गुमला), तोरसिंदरी (पश्चिम सिंहभूम) और सालगाडीह (तमाड़, रांची)—में लागू है।
इस पहल के तहत कक्षा 10 से 12 तक के 200 से अधिक छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस करना है, ताकि वे मुख्यधारा के बराबर अवसर हासिल कर सकें।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में छात्रों को Python प्रोग्रामिंग, टैली, एडवांस्ड एक्सेल और पावर BI जैसे विषयों की ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही हर सप्ताह थ्योरी और प्रैक्टिकल सत्र आयोजित किए जाते हैं, और अध्ययन सामग्री हिंदी व संथाली भाषा में उपलब्ध कराई जाती है।
प्रोफेसर रश्मि सिंह ने बताया कि यह पहल केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में समस्या समाधान क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने पर भी केंद्रित है, जिससे वे उच्च शिक्षा और डिजिटल दुनिया में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
👉 यह कार्यक्रम आदिवासी युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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