धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति, आर्थिक और राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. सुव्रोकमल दत्ता ने नए छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य मानव बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता को आगे बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसकी जगह लेना।
पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. दत्ता ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल है और यहां के छात्रों के पास तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश और दुनिया के लिए नए समाधान विकसित करने का शानदार अवसर है। उन्होंने संस्थान को अपनी “दूसरी कर्मभूमि” बताते हुए यहां के शैक्षणिक माहौल की सराहना की।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से एआई और सूचना प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रही है, लेकिन किसी भी तकनीक की वास्तविक ताकत उसे उपयोग करने वाले व्यक्ति की सोच, नैतिकता और मूल्यों पर निर्भर करती है। इसलिए छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाओं, स्वतंत्र सोच और सामाजिक जिम्मेदारी को भी समान महत्व देना चाहिए।
डॉ. दत्ता ने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और समाज की बेहतरी के लिए तकनीक का उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि “विकसित भारत” के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी और आईआईटी (आईएसएम) जैसे संस्थानों के छात्र इस परिवर्तन के प्रमुख भागीदार बन सकते हैं।
उन्होंने आईआईटी (आईएसएम) की वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि खनन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में संस्थान का कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है, जिससे छात्रों के लिए शोध और नवाचार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों से अनुशासन, जिज्ञासा, निरंतर सीखने की आदत और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक होगी, जब उसका उपयोग मानवता और समाज के हित में किया जाए।
डॉ. सुव्रोकमल दत्ता अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति, आर्थिक एवं राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, मीडिया विश्लेषक और नीति रणनीतिकार हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं तथा आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में व्याख्यान दे चुके हैं।
यह व्याख्यान आईआईटी (आईएसएम) के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य नए छात्रों को संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति, मूल्यों और उपलब्ध अवसरों से परिचित कराना तथा उन्हें जिम्मेदार, नवाचारी और संवेदनशील पेशेवर बनने के लिए प्रेरित करना है।
















