धनबाद : धनबाद सदर अस्पताल के प्रस्तावित 400 बेड वाले आधुनिक भवन के निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को धनबाद के अंचलाधिकारी (सीओ) रामप्रवेश राम ने सदर अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ रणधीर वर्मा चौक के समीप स्थित अस्पताल परिसर की सरकारी भूमि का निरीक्षण किया और अतिक्रमण की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान सीओ ने अस्पताल की जमीन पर लंबे समय से रह रहे परिवारों को मकान खाली करने का निर्देश दिया। बताया गया कि इस क्षेत्र में करीब आधा दर्जन परिवार पिछले 60 से 70 वर्षों से घर बनाकर निवास कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल विस्तार परियोजना के लिए इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक है।
स्थल निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति ने करीब 5 कट्ठा भूमि पर अपना रैयती अधिकार होने का दावा किया। उनका कहना था कि वर्ष 2006 में उच्च न्यायालय से उन्हें इस संबंध में निर्णय भी प्राप्त हुआ था। इस पर सीओ ने संबंधित व्यक्ति को सभी भूमि संबंधी दस्तावेज कार्यालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, ताकि दावे की विधिवत जांच की जा सके।
सीओ रामप्रवेश राम ने कहा कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत धनबाद में 400 बेड का अत्याधुनिक सदर अस्पताल बनाया जाना है। इसके लिए सरकारी भूमि को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक वहां रह रहे परिवारों की ओर से स्वामित्व से जुड़े कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, इसलिए सभी को भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों को मुआवजा या वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं, इसका अंतिम निर्णय राज्य सरकार और वरीय अधिकारियों के स्तर पर लिया जाएगा।
वहीं, प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें हटाने से पहले पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि वे कई दशकों से यहां रह रहे हैं और बिना वैकल्पिक जमीन या आवास के घर खाली करना उनके लिए संभव नहीं है।
दूसरी ओर, जमीन पर स्वामित्व का दावा करने वाले डॉ. कुमार आलोक ने कहा कि उनके पास 5 कट्ठा भूमि से संबंधित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और वर्ष 2006 में उन्हें उच्च न्यायालय से डिग्री भी मिली है। उन्होंने कहा कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखेंगे।
फिलहाल जिला प्रशासन अस्पताल विस्तार परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि प्रभावित परिवार पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग पर अड़े हुए हैं।
















