रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि तलाक के बाद महिला के दूसरी शादी करने के बाद पूर्व पति का उससे दोबारा निकाह करने से इनकार करना अपने आप में संज्ञेय अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने प्रार्थी इमरान हुसैन की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर करते हुए उन्हें राहत दी।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पूर्व पति तलाकशुदा पत्नी से दोबारा शादी करने के लिए तैयार नहीं है, उसे कानूनी तौर पर निकाह के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, महज इनकार को आधार बनाकर नया आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान नहीं है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाक के बाद महिला के दूसरी शादी कर लेने की स्थिति में पूर्व पति द्वारा दोबारा निकाह से इनकार करने मात्र को अपराध नहीं माना जा सकता। हालांकि, मामले से जुड़े अन्य आरोप और परिस्थितियां अलग-अलग कानूनी रूप से देखी जा सकती हैं।
बताया गया कि इस मामले में धनवार थाना में वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसे बाद में समझौते के आधार पर निपटाया गया था। अग्रिम जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने इमरान हुसैन को तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
















