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केंदुआडीह में गैस रिसाव और भू-धंसान से दहशत, छह माह से भय के साये में जी रहे लोग

JP Bharat Shareधनबाद: धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में लगातार हो रहे गैस रिसाव और भू-धंसान की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाली मुख्य सड़क को बंद करना पड़ा है। हालांकि, सुरक्षा के लिए उठाए गए इस कदम…

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धनबाद: धनबाद जिले के केंदुआडीह क्षेत्र में लगातार हो रहे गैस रिसाव और भू-धंसान की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि प्रशासन को प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाली मुख्य सड़क को बंद करना पड़ा है। हालांकि, सुरक्षा के लिए उठाए गए इस कदम से आम लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो गई है और उन्हें आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य सड़क बंद होने के बाद स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना पड़ रहा है, लेकिन उस रास्ते को लेकर भी लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह क्षेत्र में लगातार जमीन धंसने और गैस रिसाव की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे वैकल्पिक मार्ग भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, लगभग एक माह पूर्व क्षेत्रीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित इलाके का दौरा कर धरना-प्रदर्शन किया था। उस दौरान लोगों को आश्वासन दिया गया था कि मुख्य सड़क को जल्द चालू कराया जाएगा और समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लेकिन समय बीतने के बावजूद अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले छह महीनों से भय और अनिश्चितता के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं। लोगों के अनुसार दिन तो किसी तरह बीत जाता है, लेकिन रात के समय जमीन धंसने या किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका उन्हें लगातार परेशान करती रहती है। कई परिवारों ने बताया कि लगातार हो रही घटनाओं के कारण वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बीसीसीएल, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रभावित क्षेत्र की वैज्ञानिक जांच कर स्थायी उपाय किए जाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

क्षेत्र में लगातार बनी हुई इस गंभीर स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर कब तक उन्हें इस भयावह स्थिति में रहना पड़ेगा और कब उन्हें सुरक्षित एवं सामान्य जीवन मिल पाएगा।


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