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क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर प्रशासन सख्त, निजी अस्पतालों और क्लिनिकों के शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन पर जोर

JP Bharat Shareधनबाद: जिले के सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक और नर्सिंग होम का शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी Aditya Ranjan के निर्देश पर समाहरणालय सभागार में सभी बीडीओ, अंचल अधिकारी, एमओआईसी और पुलिस पदाधिकारियों को एक्ट…

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धनबाद: जिले के सभी निजी अस्पताल, क्लिनिक और नर्सिंग होम का शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी Aditya Ranjan के निर्देश पर समाहरणालय सभागार में सभी बीडीओ, अंचल अधिकारी, एमओआईसी और पुलिस पदाधिकारियों को एक्ट से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रांची से आए क्लिनिकल कंसलटेंट मुकेश कुमार ने पंजीकरण प्रक्रिया, कानूनी आवश्यकताओं, निरीक्षण और अनुपालन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी Lokesh Barange ने कहा कि जिले के सभी हॉस्पिटल, क्लिनिक और नर्सिंग होम में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से पहले संस्थानों को सूचित किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान में प्रमुख स्थान पर पंजीकरण प्रमाण पत्र, फायर सेफ्टी उपकरण, डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की सूची, उपचार एवं सेवाओं की दर सूची, उपलब्ध सुविधाएं, बेड की संख्या, नागरिक चार्टर, रोगी अधिकार, शिकायत निवारण संपर्क नंबर और आपातकालीन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने चाहिए।

इसके अलावा बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और सुरक्षा मानकों से संबंधित जानकारी भी संस्थानों में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए।

एसडीएम ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को नोटिस जारी किया जाएगा। लगातार उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में प्रतिष्ठान को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

उन्होंने विशेष रूप से मेडिकल स्टोर के आसपास संचालित क्लिनिकों के लाइसेंस की जांच करने और प्रखंड स्तर पर भी नियमित निरीक्षण अभियान चलाने का निर्देश दिया।

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि संस्थानों को लाइसेंस समय पर नवीनीकरण कराना चाहिए, कर्मचारियों और उपकरणों का अद्यतन रिकॉर्ड रखना चाहिए तथा मरीजों की सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ इंदर सिंह नामधारी, डीआरसीएचओ डॉ रोहित गौतम, डीपीएम प्रतिमा कुमारी, आयुष पदाधिकारी कुमकुम कुमारी सहित स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के कई अधिकारी मौजूद रहे।


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