धनबाद: भारतीय रेलवे को सबसे अधिक राजस्व देने वाले मंडलों में शामिल धनबाद रेल मंडल एक बार फिर अपनी रिकॉर्ड कमाई को लेकर चर्चा में है। कोयला परिवहन और माल ढुलाई के जरिए रेलवे के खजाने को भरने वाला यह मंडल राजस्व के मामले में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। लेकिन इस उपलब्धि के बीच स्टेशन परिसर के पास फैली गंदगी और कचरे का अंबार रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि धनबाद रेलवे स्टेशन के समीप महीनों से कचरा डंप किया जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि स्टेशन के बगल में कचरे का एक विशाल ढेर जमा हो गया है, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। यात्रियों को विशेष रूप से स्टेशन के आसपास आने-जाने के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि जिस मंडल से रेलवे को अरबों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, वहां बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था की यह स्थिति चिंताजनक है। स्टेशन की साफ-सफाई और आसपास के क्षेत्र के रखरखाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाती है कचरे के ढेर पर मंडराती आवारा गायों और मवेशियों की तस्वीर। भोजन की तलाश में भटक रहे पशु सड़े-गले कचरे और प्लास्टिक को खाने के लिए मजबूर हैं। इससे न केवल पशुओं के स्वास्थ्य पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, बल्कि यह पशु कल्याण के दृष्टिकोण से भी चिंताजनक स्थिति है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ओर रेलवे स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छ स्टेशन के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर मुख्य स्टेशन के बगल में फैली गंदगी इन दावों की वास्तविकता को उजागर कर रही है। लोगों ने रेल प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने और कचरा निष्पादन की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है।
यात्रियों का कहना है कि धनबाद जैसा महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन, जो देश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले मंडलों में शामिल है, वहां इस प्रकार की स्थिति रेलवे की छवि को भी प्रभावित करती है। उनका मानना है कि जिस तरह राजस्व बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है, उसी तरह यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता पर भी प्राथमिकता से काम किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है और स्टेशन परिसर के आसपास फैली गंदगी से लोगों को कब राहत मिलती है।
















