झारखंड: देश के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी समाज के चिंतकों ने मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान मारांग बुरु को आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति, परंपरा और पहचान का अभिन्न प्रतीक बताया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि मारांग बुरु केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक पहचान से जुड़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि आदिवासी आस्था और परंपराओं को केवल सरकारी दस्तावेजों या अभिलेखों के आधार पर नहीं, बल्कि समाज की पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं और जीवनशैली के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए।
















