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निखिल भारत बांगो साहित्य सम्मेलन की धनबाद शाखा का गठन, बांग्ला भाषा और संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प

JP Bharat Shareधनबाद: निखिल भारत बांगो साहित्य सम्मेलन, दिल्ली के बैनर तले बुधवार को धनबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन श्रीमती रेखा मंडल के आवास पर किया गया, जिसकी अध्यक्षता सुजीत रंजन ने की। बैठक में संगठन की धनबाद शाखा का गठन किया गया तथा बांग्ला भाषा, साहित्य और संस्कृति…

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धनबाद: निखिल भारत बांगो साहित्य सम्मेलन, दिल्ली के बैनर तले बुधवार को धनबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन श्रीमती रेखा मंडल के आवास पर किया गया, जिसकी अध्यक्षता सुजीत रंजन ने की। बैठक में संगठन की धनबाद शाखा का गठन किया गया तथा बांग्ला भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि निखिल भारत बांगो साहित्य सम्मेलन देश का लगभग 100 वर्ष पुराना संगठन है, जिसने लंबे समय से बांग्ला भाषा और साहित्य के विकास के लिए कार्य किया है। संगठन से अतीत में महान साहित्यकार रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी जुड़े रहे हैं।

बैठक में यह भी कहा गया कि स्वतंत्रता आंदोलन में बंगभाषी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। संगठन के सदस्यों ने बांग्ला भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाने और उसके प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।

धनबाद शाखा की नई कार्यकारिणी समिति में बेंगू ठाकुर को अध्यक्ष, श्रीमती रेखा मंडल को कार्यकारी अध्यक्ष तथा सुजीत रंजन, रघुनाथ रॉय, पार्थ सारथी दत्ता और अशोक पाल को उपाध्यक्ष बनाया गया। भवानी बंदोपाध्याय को सचिव, साधन चटर्जी, नारायण चंद्र पाल और पापू सूत्रधार को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। परितोष घोषाल को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

इसके अलावा सुजाता रंजन, पिया बनर्जी और हिना दास को संगठन सचिव बनाया गया, जबकि गोविन्दो ठाकुर को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। माधव चंद्र मंडल, सत्यजीत मंडल, सुशांत मंडल, मुकुल चंद्र दास, लालजीत गोराई और साधन चटर्जी को मानद सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने बांग्ला भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक इसकी समृद्ध परंपराओं को पहुंचाने का संकल्प लिया। साथ ही भाषा और संस्कृति के सम्मान के लिए संगठित रूप से कार्य करने का निर्णय लिया गया।


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