पूर्वी टुंडी:
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), धनबाद के सचिव मयंक तुषार टोपनो के निर्देशानुसार बुधवार को पूर्वी टुंडी प्रखंड के मैरानवाटांड पंचायत अंतर्गत कुरकुटांड गांव के भोगता टोला आदिवासी टोला में विशेष कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर डालसा के “90 डेज आउटरिच प्रोग्राम” संवाद योजना के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों तक कानूनी अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना था।
शिविर में डालसा के पीएलवी (पारा लीगल वॉलंटियर) ओमप्रकाश दास, रमेश किस्कू और प्रदीप गोराई ने ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के हमले या संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की व्यवस्था उपलब्ध है और जरूरतमंद लोग इसका लाभ उठा सकते हैं।
कई महत्वपूर्ण योजनाओं की दी गई जानकारी
जागरूकता शिविर के दौरान ग्रामीणों को संवाद योजना, जागृति योजना, डॉन योजना, आशा योजना और वीर परिवार योजना के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि गरीब एवं जरूरतमंद लोग निःशुल्क अधिवक्ता यानी सरकारी वकील की सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
डालसा कर्मियों ने लोगों को बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग बिना किसी खर्च के विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई।
लोक अदालत और टोल-फ्री सेवा पर विशेष जोर
शिविर में लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विवादों के त्वरित एवं सुलभ समाधान की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि छोटे-छोटे विवादों का निपटारा आपसी सहमति और कम खर्च में लोक अदालत के माध्यम से किया जा सकता है।
इसके साथ ही ग्रामीणों को टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी जागरूक किया गया। बताया गया कि किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता, सलाह या शिकायत के लिए लोग इस नंबर पर संपर्क कर मुफ्त मदद प्राप्त कर सकते हैं।
बड़ी संख्या में शामिल हुए ग्रामीण
जागरूकता शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, महिलाएं एवं युवाओं ने भाग लिया। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से गांव के लोगों को अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं की सही जानकारी मिलती है, जिससे वे जागरूक और सशक्त बनते हैं।
















