रांची : झारखंड में सामान्य से कम बारिश और संभावित सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने कृषि तैयारियों को तेज करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को समय पर खाद, बीज, तकनीकी सहायता और सिंचाई संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मौसम की चुनौती के बावजूद खेती प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पलामू प्रमंडल सहित कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को धान की बजाय दलहन, मिलेट (श्रीअन्न) और अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के अनुरूप कृषि पद्धतियों में बदलाव समय की आवश्यकता है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य के हर जिले में मॉडल किसान पाठशाला स्थापित की जाएगी। इन पाठशालाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक खेती और उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने गढ़वा जिले के भवनाथपुर स्थित किसान पाठशाला की प्रगति की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा भी की।
मुख्यमंत्री ने किसान समृद्धि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए अधिकारियों को किसानों को जल्द से जल्द सोलर पंप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सिंचाई आसान होगी और किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता कम होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस बीच, राज्य में मानसून की धीमी रफ्तार का असर धान की खेती पर भी दिखाई दे रहा है। इस वर्ष झारखंड में 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन 15 जुलाई तक केवल 2.36 लाख हेक्टेयर (करीब 13.14 प्रतिशत) क्षेत्र में ही बुआई और रोपाई हो सकी है। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर स्थिति है, फिर भी कई जिलों में खेती अब तक शुरू नहीं हो पाने से किसानों की चिंता बनी हुई है।
सरकार का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर किसानों के हित में अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे।
















