रांची/कटक: नई दिल्ली स्थित केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के महानिदेशक वैद्य प्रो. रविनारायण आचार्य ने कहा कि आयुर्वेद का मानव जीवन से गहरा और अटूट संबंध है। इसके सिद्धांतों को समझकर जनकल्याण के लिए उपयोग में लाना हम सभी की जिम्मेदारी है। वे ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय के श्री श्री आयुर्वेद महाविद्यालय द्वारा नराज ग्राम में आयोजित “आयुर्वेद आधारित जीवनशैली एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में औषधीय वनस्पतियों का उपयोग” विषयक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री श्री विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) तेज परताप ने किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण जीवनशैली है। विश्वविद्यालय इस दिशा में हर संभव सहयोग करता रहेगा।
महाविद्यालय की डीन प्रो. (डॉ.) क्षीराब्धि तनया राउताराय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि परियोजना के प्रमुख अन्वेषक प्रो. (डॉ.) रमाकांत राउत ने लगभग 500 ग्रामीणों को कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए आयुर्वेद के माध्यम से भावी पीढ़ी को स्वस्थ और निरोग बनाने पर जोर दिया।
पूर्व डीन प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार पंडा ने लोगों से आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने की अपील की और इसके स्वास्थ्य लाभों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर “औषधीय वृक्षों के घरेलू उपचार” एवं “आयुर्वेद में दैनिक कार्यप्रणाली” नामक दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद, भुवनेश्वर के डॉ. सुधांशु मेहर, डॉ. क्षीरोद रथ और डॉ. यशपाल भारद्वाज सहित बारंग ब्लॉक की अध्यक्ष सावित्री दलेई एवं नराज पंचायत की सरपंच गीतांजलि साहू भी उपस्थित रहीं और आयुर्वेद के महत्व पर अपने विचार रखे।
अंत में सह-प्रमुख अन्वेषक प्रो. (डॉ.) शिवप्रसाद महांति ने धन्यवाद ज्ञापन किया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आदेश गोयल एवं कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य जी ने सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बधाई दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विद्यार्थी एवं शिक्षक शामिल हुए।
















