धनबाद: ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड जिला इकाई धनबाद द्वारा “भविष्य के भारत” राष्ट्रीय अभियान के तहत “भारत में शहरीकरण की चुनौतियां: धनबाद शहर की दो बस्तियों का सर्वेक्षण” विषय पर तैयार रिपोर्ट को लेकर बुधवार को हीरापुर स्थित मंगलायतन विश्वविद्यालय कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान समिति ने धनबाद की झुग्गी-बस्तियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए समावेशी शहरी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. काशी नाथ चटर्जी ने कहा कि भारत सहित पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ता शहरीकरण नई चुनौतियां पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहरों का विकास केवल सड़क, फ्लाईओवर और ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि गरीब और वंचित लोगों को आवास, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने से मापा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में खरिकाबाद और सिंदरी की बस्तियों के 220 परिवारों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया। सर्वे में सामने आया कि लगभग 90 प्रतिशत परिवारों में केवल एक कमाने वाला सदस्य है और अधिकांश परिवार वर्षों से वहां रहने के बावजूद भूमि स्वामित्व से वंचित हैं। इसी कारण उन्हें सरकारी आवास योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, खरिकाबाद में केवल 3 प्रतिशत और सिंदरी में 7 प्रतिशत परिवारों को ही आवास योजना का लाभ मिला है।
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि खरिकाबाद के 80 प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं है, जबकि करीब 79 प्रतिशत परिवार खुले में शौच करने को मजबूर हैं। अधिकांश परिवारों को घर के बाहर से पानी लाना पड़ता है और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी गंभीर बनी रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, खरिकाबाद के 92 प्रतिशत और सिंदरी के 71 प्रतिशत परिवार वर्षा के समय जलभराव से प्रभावित होते हैं। वहीं, दोनों बस्तियों के 93 से 94 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं।
वैज्ञानिक जागरूकता उपसमिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. दीपक कुमार सेन ने कहा कि वर्तमान शहरी विकास मॉडल समावेशी नहीं है। जब तक बस्तियों में रहने वाले लोगों को आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा।
समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रवि सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए चेतावनी भी है और जनपक्षीय शहरी विकास की दिशा में एक ठोस दस्तावेज भी। वहीं, राज्य उपाध्यक्ष हेमंत कुमार जायसवाल ने नगर निगम से बस्तियों के लिए समयबद्ध विकास योजना तैयार करने की मांग की।
जिला सचिव भोला नाथ राम ने बताया कि करीब 30 स्वयंसेवकों ने लगभग 20 दिनों तक घर-घर जाकर वैज्ञानिक तरीके से सर्वेक्षण किया। वहीं, जनवादी युवा आंदोलन के विकास कुमार ठाकुर ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की आवाज है।
प्रेस वार्ता में ज्ञान विज्ञान समिति ओडिशा की मिनाती स्वेन, रानी मिश्रा, मुकेश कुमार, प्रो. जितेंद्र बनर्जी, मधेश्वर नाथ भगत सहित समिति के कई कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
















