धनबाद: धनबाद कोयलांचल में भू-धंसान का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। दशकों पुरानी भूमिगत खनन गतिविधियों, बंद खदानों, भूमिगत खाली जगहों, कमजोर पिलरों, पुराने गोफ और भूमिगत आग के कारण कई इलाके संवेदनशील बताए जा रहे हैं। हाल की घटनाओं ने एक बार फिर इस खतरे को सामने ला दिया है।
13 सितंबर को रामकनाली क्षेत्र में बंद खदान में कथित अवैध कोयला खनन के दौरान भू-धंसान की घटना सामने आई थी। वहीं इससे पहले 8 सितंबर को सिजुआ की तीनपटिया बस्ती में जमीन धंसने की घटना में एक बच्चे की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। जुलाई-अगस्त के दौरान छाताबाद क्षेत्र में भी घरों के आसपास जमीन धंसने की घटनाएं सामने आई थीं।
2.3 से 2.75 लाख लोगों पर संभावित खतरा
सबसे बड़ी चिंता यह है कि संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में केवल खाली जमीन ही नहीं, बल्कि घर, सड़क, स्कूल, बाजार और पूरी बस्तियां भी बसी हुई हैं।
उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, धनबाद शहर से सटे संवेदनशील इलाकों में करीब 10 से 15 हजार, झरिया में 50 से 60 हजार, कतरास में 70 हजार से 1 लाख और निरसा में करीब 1 लाख लोग संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार करीब 2.3 से 2.75 लाख लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, संवेदनशील क्षेत्र और प्रभावित आबादी के सटीक आंकड़े संबंधित सरकारी सर्वे और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।
भू-धंसान की लगातार घटनाओं के बीच प्रभावित इलाकों में सुरक्षा, पुनर्वास, अवैध खनन पर रोक और पुराने खनन क्षेत्रों की निगरानी को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
















