धनबाद: IIT (ISM) धनबाद के पूर्व छात्र सौरव सिंह और उनके को-फाउंडर की कंपनी ने स्वदेशी तकनीक से ऐसा ड्रोन तैयार किया है, जिसने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल के दौरान 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक उड़ान भरी। सेना की ओर से इस ऊंचाई पर लगातार 45 मिनट उड़ान का लक्ष्य रखा गया था, जिसे ड्रोन ने निर्धारित समय से काफी अधिक उड़ान भरकर पूरा किया।
सौरव सिंह IIT (ISM) के 2020 बैच के छात्र रहे हैं और उन्होंने 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया। वह Zenith Unmanned Systems Pvt. Ltd. के को-फाउंडर हैं। वर्ष 2025 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप IIT (ISM) धनबाद के सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) में इनक्यूबेटेड है।
85 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
स्टार्टअप ने अपने ड्रोन का नाम विजय Z-1 रखा है। यह एक UAV यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल है, जिसमें पायलट के बैठने की आवश्यकता नहीं होती। इसे कठिन मौसम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी समेत विभिन्न कार्यों के लिए तैयार किया गया है।
ड्रोन पर काम अगस्त 2025 में शुरू हुआ था। कंपनी के अनुसार, शुरुआती प्रोटोटाइप ने 100 मिनट से अधिक की उड़ान भरी थी। अब तक पांच प्रोटोटाइप तैयार किए जा चुके हैं, जबकि जून 2026 में तैयार छठा वर्जन फाइनल वर्जन है। इसमें 85 फीसदी से अधिक स्वदेशी कंटेंट होने का दावा किया गया है। कार्बन-फाइबर फ्रेम भी टीम ने खुद डिजाइन और विकसित किया है।
कंपनी के अनुसार ड्रोन पर 1000 घंटे से अधिक ग्राउंड टेस्टिंग और क्रैश टेस्टिंग की जा चुकी है।
अलग-अलग ऊंचाइयों पर प्रदर्शन
विजय Z-1 ने सामान्य ऊंचाई पर 2 घंटे 22 मिनट, 12 हजार फीट पर 1 घंटे 20 मिनट 33 सेकेंड और 14 हजार फीट पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड की उड़ान का प्रदर्शन किया है।
ड्रोन की ऑपरेशनल ऊंचाई 4200 मीटर, रेंज 40 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 500 ग्राम तक बताई गई है। इसे 1.2 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। ड्रोन का वजन करीब 2.7 किलोग्राम है और यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर काम करता है।
अरुणाचल प्रदेश में सेना ने किया ट्रायल
भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड की ओर से 3 और 4 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के हाई-एल्टीट्यूड बेस कैंप और सेला टॉप के ऊपर विजय Z-1 का ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान बारिश और कोहरे जैसी परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन ने उड़ान भरी।
ट्रायल के बाद कंपनी के अनुसार भारतीय सेना की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। सितंबर 2026 में ड्रोन का प्रोक्योरमेंट-लेवल वैलिडेशन टेस्टिंग चरण चल रहा है।
सौरव सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में डिफेंस टेक्नोलॉजी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी तकनीकों में देश को आत्मनिर्भर बनना होगा।
IIT (ISM) के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक दास ने विजय Z-1 को संस्थान के पूर्व छात्रों की तकनीकी सोच और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता का उदाहरण बताया।
हर महीने 90 ड्रोन बनाने की क्षमता
कंपनी फिलहाल बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप के रूप में काम कर रही है और उसके अनुसार इसकी उत्पादन क्षमता हर महीने करीब 90 ड्रोन की है। कंपनी ड्रोन की दूसरी सीरीज और हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम पर भी काम कर रही है। इसके अलावा 50 मिनट से अधिक फ्लाइट टाइम वाले कॉम्पैक्ट ट्रेनिंग ड्रोन को भी कमर्शियलाइजेशन के लिए तैयार किया जा रहा है।
















