नई दिल्ली: देश के कई बड़े शहर इन दिनों गंभीर जल संकट की चुनौती का सामना कर रहे हैं। आर्थिक राजधानी मुंबई से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने भारत में बढ़ते जल संकट को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, बिखरी हुई जल प्रबंधन व्यवस्था, भूजल का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। मूडीज का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुधार नहीं किए गए तो जल संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, कृषि और आम जनजीवन पर पड़ सकता है।
मुंबई में स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले प्रमुख जलाशयों में सीमित जल भंडार बचा है। वहीं दिल्ली के कई इलाकों में भी नियमित जलापूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की जल प्रबंधन प्रणाली विभिन्न राज्यों में बंटी हुई है, जिससे संसाधनों के समन्वित उपयोग और संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में कठिनाई आती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र देश के लगभग 80 प्रतिशत मीठे जल का उपयोग करता है, जबकि बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, जल पुनर्चक्रण, जलाशयों के संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन नीतियों को प्राथमिकता देकर इस संकट की गंभीरता को कम किया जा सकता है। साथ ही जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने की भी आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इसका असर कृषि उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास पर भी दिखाई दे सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते सूखे, हीटवेव और अनियमित मानसून जैसी परिस्थितियां इस चुनौती को और गंभीर बना सकती हैं। �
















