धनबाद : अग्नि प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों को बेहतर और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई झारखंड की पहली इलेक्ट्रिक बस अब अपनी क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों का भार उठाने को मजबूर है। बेलगड़िया टाउनशिप से धनबाद शहर के बीच संचालित इस बस में बैठने की क्षमता मात्र 37 यात्रियों की है, लेकिन प्रतिदिन करीब 100 यात्री सफर कर रहे हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह और शाम के व्यस्त समय में बस पूरी तरह खचाखच भर जाती है। कई यात्रियों को दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है, जबकि कुछ लोगों को अगली बस का इंतजार करना पड़ता है। क्षमता से अधिक यात्रियों के सफर करने के कारण दुर्घटना की आशंका भी लगातार बनी रहती है।
ओवरलोडिंग का सबसे अधिक असर महिलाओं, छात्राओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि भीड़ के कारण बस में चढ़ना और उतरना काफी मुश्किल हो जाता है। सफर के दौरान धक्का-मुक्की और असुविधा के चलते वे खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बेलगड़िया टाउनशिप में अब हजारों विस्थापित परिवार रह रहे हैं, लेकिन परिवहन व्यवस्था के नाम पर अब भी केवल एक ही इलेक्ट्रिक बस संचालित की जा रही है। बढ़ती आबादी के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।
लोगों ने बीसीसीएल और जिला प्रशासन से मांग की है कि बेलगड़िया रूट पर अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जल्द शुरू किया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक परिवहन सुविधा मिल सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
















