धनबाद/पूर्वी टुंडी : आजादी के दशकों बाद भी धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड अंतर्गत मछियारा पंचायत के बाघमारा गांव स्थित भेलवाबेड़ा टोला विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहा है। सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीण आज भी कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच इस गांव की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों के अनुसार, मुख्य सड़क से गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्का और सुगम मार्ग उपलब्ध नहीं है। पहाड़ी और पथरीले रास्ते के कारण चारपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। बरसात के दिनों में यही रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।
सबसे अधिक परेशानी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। किसी महिला को प्रसव पीड़ा हो या कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में ग्रामीण मरीजों को खटिया पर लादकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाने को विवश होते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार स्थिति और गंभीर हो जाती है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी गांव के बच्चों और छात्राओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से छात्राओं को साइकिल तो उपलब्ध कराई गई है, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण उसका लाभ नहीं मिल पा रहा। मजबूरन छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन पैदल स्कूल जाना पड़ता है।
भेलवाबेड़ा में पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। करीब 40 परिवारों की प्यास बुझाने के लिए पूरे टोले में केवल एक कुआं ही सहारा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी चापाकल वर्षों से खराब पड़ा है और उसकी मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं की गई।
ग्रामीण जीतूलाल हेंब्रम, सजूवा देवी, प्रीति कुमारी सहित अन्य लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षों से सड़क और पेयजल की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि चुनाव के समय केवल वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब गांव तक पक्की सड़क, शुद्ध पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक बुनियादी सुविधाएं गांव तक नहीं पहुंचेंगी, तब तक विकास के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे।
















