निरसा (धनबाद): कंचनडीह में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य श्री राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े शबरी मिलन प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को सच्ची भक्ति का संदेश दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम तक पहुंचने का मार्ग किसी जाति, वेशभूषा या विद्वता से नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम, सेवा, समर्पण और अटूट श्रद्धा से प्रशस्त होता है। उन्होंने शबरी के जीवन को धैर्य, विश्वास और भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण बताते हुए कहा कि वर्षों तक प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा करने वाली शबरी की भक्ति आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।
कथा के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के शबरी आश्रम पहुंचने तथा प्रेमपूर्वक अर्पित किए गए बेर स्वीकार करने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरे कथा स्थल पर ‘जय श्रीराम’ के जयघोष और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रीराम कथा महोत्सव का आयोजन कंचनडीह, निरसा में श्री वीरेन्द्र राय एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में शामिल होकर धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठा रहे हैं।
















