धनबाद : जनजातीय युवाओं को डिजिटल युग की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान के मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग ने जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA), भारत सरकार के सहयोग से संचालित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल वेलफेयर के तहत 9 और 10 जुलाई को झारखंड के तीन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) में दो दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ईएमआरएस तमाड़ (रांची), ईएमआरएस बसिया (गुमला) और ईएमआरएस कुजरा (लोहरदगा) के कक्षा 10 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को पाइथन प्रोग्रामिंग, एडवांस एक्सेल और अन्य आधुनिक डिजिटल टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान लाइव डेमो, हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल, केस स्टडी और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक के व्यवहारिक उपयोग से परिचित कराया गया। दूसरे दिन छात्रों ने प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों और प्रैक्टिकल एक्सरसाइज के जरिए सीखे गए कौशल का अभ्यास भी किया।
एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों की स्थापना जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने तथा उन्हें उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और बेहतर करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की गई है।
मैनेजमेंट स्टडीज एवं इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर रश्मि सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य जनजातीय छात्रों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों में दक्ष बनाकर उन्हें भविष्य की शिक्षा और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।
वहीं, प्रोफेसर निलाद्रि दास ने कहा कि प्रैक्टिकल आधारित प्रशिक्षण से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे तकनीकी अवधारणाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समझ पाते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल कौशल आज के समय में युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने का माध्यम बन रहा है।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल वेलफेयर जनजातीय कार्य मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसके माध्यम से तकनीक आधारित शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जुलाई 2024 से संचालित इस एक वर्षीय कार्यक्रम के तहत अब तक झारखंड के सात ईएमआरएस स्कूलों के 200 से अधिक छात्र-छात्राओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
















