बेंगलुरु: भारतीय राजपूताना सेवा संगठन की श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण समापन, देवी राजनंदनी जी की विदाई ने नम कर दीं आंखें

JP Bharat Shareबेंगलुरु: भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। संगठन के बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह, व्हाइटफ़ील्ड अध्यक्ष आशुतोष सिंह, आयोजन सचिव संजय सिंह एवं उनकी टीम के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में सातों दिन…

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बेंगलुरु: भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। संगठन के बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह, व्हाइटफ़ील्ड अध्यक्ष आशुतोष सिंह, आयोजन सचिव संजय सिंह एवं उनकी टीम के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में सातों दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा का रसपान किया।

समापन दिवस पर विख्यात राष्ट्रीय कथा वाचिका परम पूज्या देवी राजनंदनी जी ने भगवान श्रीकृष्ण–सुदामा मिलन का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि सच्ची मित्रता, निस्वार्थ प्रेम, विनम्रता और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। कथा के साथ प्रस्तुत श्रीकृष्ण–सुदामा मिलन की मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा पंडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोषों से गूंज उठा तथा अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

समापन समारोह में भारतीय राजपूताना सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने आयोजन को सफल बनाने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, मातृशक्ति, युवाशक्ति, दानदाताओं, सहयोगियों, मीडिया प्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल सात दिनों की कथा नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाला आध्यात्मिक महोत्सव बन गया।

उन्होंने परम पूज्या देवी राजनंदनी जी के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, संस्कार और सनातन धर्म के प्रति नई चेतना का संचार किया है। विदाई के भावुक क्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सात दिनों में श्रद्धालुओं का कथा और कथावाचिका से गहरा आत्मीय जुड़ाव बन गया था, इसलिए विदाई के समय पूरा वातावरण भावुक हो उठा।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक महाआरती, पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। अंत में संगठन ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी धर्म, संस्कृति और समाजसेवा से जुड़े ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।


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