,

बगोदर में 29 जंगली हाथियों का आतंक, चार दिनों में 100 से अधिक किसानों को भारी नुकसान

JP Bharat Shareगिरिडीह: जिले के बगोदर प्रखंड के अटका क्षेत्र में 29 जंगली हाथियों का झुंड लगातार चौथे दिन सक्रिय रहा। हाथियों के झुंड ने खेतों में लगी फसलों के साथ-साथ कई संपत्तियों और सिंचाई उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया है। लगातार हाथियों की मौजूदगी से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ…

JP Bharat Share

गिरिडीह: जिले के बगोदर प्रखंड के अटका क्षेत्र में 29 जंगली हाथियों का झुंड लगातार चौथे दिन सक्रिय रहा। हाथियों के झुंड ने खेतों में लगी फसलों के साथ-साथ कई संपत्तियों और सिंचाई उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया है। लगातार हाथियों की मौजूदगी से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, हाथियों ने क्षेत्र में एक होटल को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि एक पॉल्ट्री फार्म को भी नुकसान पहुंचाया। घटना के दौरान करीब दो हजार मुर्गे भाग गए। इसके अलावा हाथियों ने कई जगहों पर चारदीवारी तोड़ दी।

हाथियों के झुंड ने खेतों और कुओं के पास लगे मोटर पंप, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और अन्य सिंचाई उपकरणों को भी क्षतिग्रस्त किया। वहीं बादाम, मिर्च, भिंडी, खीरा, धनिया पत्ता, मूली और धान समेत कई फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दिया।

100 से अधिक किसानों को नुकसान का दावा

प्रभावित किसानों के मुताबिक करीब एक किलोमीटर के दायरे में फसलों और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले चार दिनों में 100 से अधिक किसानों को करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

लगातार चौथे दिन हाथियों के क्षेत्र में मौजूद रहने से अटका सहित आसपास के गांवों में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लोग अपने खेतों और घरों के आसपास जाने से भी सावधानी बरत रहे हैं।

मुआवजे और हाथियों को सुरक्षित हटाने की मांग

प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन तथा वन विभाग से नुकसान का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही हाथियों के झुंड को आबादी वाले इलाकों से सुरक्षित तरीके से हटाकर जंगल की ओर भेजने की अपील की गई है।

वन्यजीवों और ग्रामीण आबादी के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच हाथियों के इस झुंड ने इलाके के किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।


JP Bharat Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports