नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चर्चा तेज है। एथनॉल मिश्रण को इसकी एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है, लेकिन चीनी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक तस्वीर इससे कहीं ज्यादा व्यापक है।
जानकारों के अनुसार, पिछले समय में गन्ने की खेती का रकबा करीब 4.5 लाख हेक्टेयर घटा है, जिसका असर गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन पर पड़ा। वहीं, चीनी का उत्पादन अनुमान से करीब 80 लाख टन कम रहने की बात भी सामने आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम गन्ना उत्पादन के साथ पेराई का छोटा होता मौसम, बाजार में स्टॉक की स्थिति, जमाखोरी और निर्यात जैसे कई कारक भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ स्थानों पर खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 75 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कही जा रही है। ऐसे में बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
महाराष्ट्र के पूर्व गन्ना आयुक्त शेखर गायकवाड़ के अनुसार, गन्ने का रकबा और उत्पादन दोनों में कमी चीनी की मौजूदा स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण कारक हैं।
यानी चीनी की कीमतों में तेजी को केवल एथनॉल से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं बताता। गन्ने की उपलब्धता, उत्पादन, बाजार में स्टॉक और मांग-आपूर्ति का संतुलन भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
















