धनबाद : एक ओर देश में बुलेट ट्रेन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर धनबाद के बलियापुर प्रखंड अंतर्गत करमाटांड़ पंचायत का हुचुकटांड़ गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
इस गांव की सबसे बड़ी विडंबना इसकी भौगोलिक स्थिति है—हुचुकटांड़ दोनों तरफ से रेलवे पटरियों के बीच बसा हुआ है। जो पटरियां देश को गति देती हैं, वही इस गांव के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए न तो कोई सुरक्षित मार्ग बनाया गया है और न ही अंडरपास की सुविधा दी गई है। दोनों ओर रेलवे लाइन होने के कारण गांव पूरी तरह से कट गया है, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी बारिश के मौसम में होती है। किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से कई बार मांग की है कि गांव के लिए सड़क या अंडरपास की व्यवस्था की जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।
यह स्थिति न सिर्फ विकास के दावों पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आज भी कई गांव बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।
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