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Dhanbadnews:जागृत मंदिर चिरागोड़ा में कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, झांकियों से भक्तिमय हुआ वातावरण

JP Bharat Shareधनबाद : जागृत मंदिर, चिरागोड़ा में आयोजित तृतीय प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीराम, भगवान वामन और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतारों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। वहीं…

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धनबाद : जागृत मंदिर, चिरागोड़ा में आयोजित तृतीय प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के दौरान भगवान श्रीराम, भगवान वामन और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतारों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। वहीं भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मनमोहक झांकियों और भजनों ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय बना दिया।

भागवताचार्य उज्ज्वल शांडिल्य महाराज ने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है और मानवता संकट में पड़ती है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रत्येक अवतार का उद्देश्य मानव समाज को सत्य, धर्म, करुणा, प्रेम और मर्यादा का मार्ग दिखाना है।

कथावाचन के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग और मर्यादा, भगवान वामन की विनम्रता तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, करुणा और कर्मयोग की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इन दिव्य आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत करें।

कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।

इसके बाद भगवान श्रीराम के आदर्श शासन और मर्यादा का प्रतीक राम दरबार तथा भगवान वामन और राजा बलि के प्रसंग पर आधारित भव्य झांकियों का मंचन किया गया। इन प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से जोड़ते हुए पूरे कथा स्थल को भक्ति और उल्लास से भर दिया।

अपने प्रवचन के समापन पर उज्ज्वल शांडिल्य महाराज ने कहा कि भगवान के अवतारों की महिमा केवल कथा सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति श्रीराम की मर्यादा, वामन की विनम्रता और श्रीकृष्ण के कर्मयोग को अपनाए तो परिवार, समाज और राष्ट्र में शांति, प्रेम और सद्भाव की स्थापना संभव है।

कार्यक्रम के दौरान भजनों, हरिनाम संकीर्तन और आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं को देर तक भक्ति-रस में सराबोर रखा। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्रीराम”, “जय श्रीकृष्ण” और “वामन भगवान की जय” के जयघोष गूंजते रहे।


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