रांची |
झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को कथित टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद गुरुवार को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, रांची से रिहा कर दिया गया। करीब 23 महीने बाद जेल से बाहर आने पर उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया।
जानकारी के अनुसार, आलमगीर आलम की पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं। सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को ही जमानत मिल गई थी, लेकिन आदेश की कॉपी आधिकारिक पोर्टल पर समय पर अपलोड नहीं होने के कारण मंगलवार को उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी।
रिहाई में क्यों हुई देरी?
कोर्ट के नियमों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का आदेश आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड होने के बाद ही निचली अदालत में बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। आदेश की कॉपी देर से अपलोड होने के कारण कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई और रिहाई में देरी हुई।
23 महीने से थे न्यायिक हिरासत में
आलमगीर आलम और संजीव लाल पिछले 23 महीनों से न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले उन्होंने निचली अदालत और झारखंड हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
मामला क्या है?
यह मामला कथित टेंडर घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से संबंधित है। जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं और कोर्ट में ट्रायल की प्रक्रिया जारी है।
















