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झरिया से उठी बाल श्रम उन्मूलन की आवाज, छात्रों ने केंद्र और राज्य सरकार से ‘मास्टर प्लान’ लागू करने की मांग की

JP Bharat Shareझरिया (धनबाद): विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर झरिया के कोलफील्ड चिल्ड्रेन क्लासेज़ (CCC) के छात्रों ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए एक व्यापक ‘मास्टर प्लान’ लागू करने की मांग उठाई। छात्रों ने झरिया कोयलांचल सहित पूरे देश से बाल श्रम समाप्त करने के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। रैली…

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झरिया (धनबाद): विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर झरिया के कोलफील्ड चिल्ड्रेन क्लासेज़ (CCC) के छात्रों ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए एक व्यापक ‘मास्टर प्लान’ लागू करने की मांग उठाई। छात्रों ने झरिया कोयलांचल सहित पूरे देश से बाल श्रम समाप्त करने के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। रैली में शामिल कई बच्चे स्वयं ऐसे परिवारों से आते हैं, जो आज भी कोयला खदानों और उससे जुड़े कार्यों में श्रम करने को मजबूर हैं।

CCC के संस्थापक एवं शिक्षक पिनाकी रॉय के मार्गदर्शन में आयोजित यह जागरूकता रैली बस्ताकोला स्थित अंबेडकर चौक से शुरू हुई। लगभग 50 छात्रों की भागीदारी वाली यह रैली पांच किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बंगाली कोठी, सहनापहाड़ी, राजवार बस्ती, लिलोरी पथरा और झरिया शहर के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरी।

रैली के दौरान बस्ताकोला में बाल श्रम के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन करते हुए एक दीवार को धक्का देकर यह संदेश दिया गया कि “बाल श्रम की दीवार को तोड़ना है, देश को आगे बढ़ाना है।” छात्रों ने “मास्टर प्लान लाओ, बाल मजदूरी हटाओ” और “आधी रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

सहनापहाड़ी दोबारी कोलियरी क्षेत्र में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद बच्चों को शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। यहां कई ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक मजबूरियों के कारण कोयला चुनने और बेचने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भविष्य को बेहतर बनाना था।

इस अवसर पर पिनाकी रॉय ने कहा कि पिछले आठ वर्षों से उनकी संस्था कोलफील्ड क्षेत्रों के बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश और विशेष रूप से कोयलांचल क्षेत्रों में बाल श्रम की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि 2026 की जनगणना के दौरान बाल श्रमिकों की वास्तविक संख्या का आकलन किया जाए और उनके पुनर्वास एवं शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी ‘मास्टर प्लान’ लागू किया जाए।

उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कोयला मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय, झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा जा रहा है। उनका कहना था कि “शून्य बाल श्रम” ही देश को वास्तविक रूप से विकसित और महान बना सकता है।

कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की वर्ष 2026 की थीम “बाल श्रम को रेड कार्ड दिखाएं” के अनुरूप विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें मौसुमी रॉय, संजय पंडित तथा गीता देवी सहित अन्य शिक्षकों और अभिभावकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

रैली में डाशनी देवी, जुग्गू भूमि, रेश्मी देवी, सोनू नगराम, राजबीर कुमार, नंदनी कुमारी, जीवन कुमार, प्रतीक कुमारी, अंजलि कुमारी, पायल कुमारी, गुंजन कुमारी, दीपशिखा कुमारी, मुस्कान कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, जिगर कुमार, अमन कुमार, सनी कुमार, राहुल कुमार, धनंजय कुमार, मोनू कुमार समेत बड़ी संख्या में अभिभावकों और छात्रों ने भाग लिया।

केंदुआ, जयरामपुर, झरिया और बस्ताकोला सहित विभिन्न कोलियरी क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों के साथ यह जागरूकता रैली नेताजी चौक, फूलारी बाग, झरिया में राष्ट्रगान “जन गण मन” के साथ संपन्न हुई।


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