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कतरास में पहली बार निकली बाबा श्याम की भव्य निशान यात्रा, निर्जला एकादशी पर उमड़ा आस्था का सैलाब

JP Bharat Shareकतरास: निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर कतरास के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। श्री श्याम शरणम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरुवार को कतरास में पहली बार झरिया की तर्ज पर बाबा श्याम की भव्य बहुनिशान यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और…

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कतरास: निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर कतरास के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। श्री श्याम शरणम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरुवार को कतरास में पहली बार झरिया की तर्ज पर बाबा श्याम की भव्य बहुनिशान यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया।

निशान यात्रा में श्रद्धालु हाथों में बाबा श्याम का पावन ध्वज लेकर भजन-कीर्तन और जयघोष के साथ शामिल हुए। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए श्याम मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां भक्तों ने मंदिर की परिक्रमा की और बाबा श्याम के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री श्याम” और “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष पूजा-अर्चना की व्यवस्था की गई थी। दर्शन और पूजा के बाद सभी भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इस आयोजन को सफल बनाने में श्री श्याम शरणम सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सेवादारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में ट्रस्टी राज बिहारी शर्मा, विजय गुप्ता, निखिल गुप्ता, संजय गुप्ता, कोषाध्यक्ष अवधेश प्रसाद गुप्ता, सह सचिव संजय केसरी सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट सदस्य और स्वयंसेवक मौजूद रहे। सभी ने मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था का जिम्मा संभाला।

कार्यक्रम की सफलता से उत्साहित ट्रस्ट पदाधिकारियों ने घोषणा की कि अब प्रत्येक शुक्ल पक्ष में बाबा श्याम की निशान यात्रा निकाली जाएगी। साथ ही भविष्य में दोनों एकादशियों पर इस आयोजन को और अधिक भव्य स्वरूप देने की योजना बनाई गई है। मुहर्रम के बाद आने वाले आयोजनों को भी बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे, सहयोग और सांस्कृतिक एकता को भी बढ़ावा देते हैं।


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