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माइथन में मुफ्त बिजली की मांग पर प्रदर्शन: स्मार्ट मीटर को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज

JP Bharat Shareमाइथन में स्मार्ट मीटर विरोध को लेकर उग्र प्रदर्शन माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध को लेकर धनबाद जिले के माइथन क्षेत्र में ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कालीमाटी आमकुड़ा और पुरुलिया गांव के लोगों ने डीवीसी कंबाइंड बिल्डिंग के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। मुफ्त…

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माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध को लेकर उग्र प्रदर्शन

माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध को लेकर धनबाद जिले के माइथन क्षेत्र में ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कालीमाटी आमकुड़ा और पुरुलिया गांव के लोगों ने डीवीसी कंबाइंड बिल्डिंग के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।

मुफ्त बिजली की मांग पर अड़े ग्रामीण

प्रदर्शन के दौरान माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध के साथ-साथ ग्रामीणों ने मुफ्त बिजली की भी मांग रखी। उनका कहना है कि वे विस्थापित क्षेत्र के निवासी हैं और उन्हें बिजली जैसी बुनियादी सुविधा मुफ्त मिलनी चाहिए।

भीषण गर्मी और लो-वोल्टेज से परेशानी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध के पीछे एक बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या है। बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली बाधित होने से छात्रों और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन

इस प्रदर्शन का नेतृत्व मुखिया कंचन महतो, बबलू चौधरी, मनोज हेमब्रम, प्रियांशु मरांडी, नीलिमा शर्मा और अंजू मुर्मू ने किया। माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध के दौरान सभी नेताओं ने एक स्वर में ग्रामीणों की समस्याओं को उठाया।

गेट से हटाए जाने के बाद वार्ता

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों को मुख्य गेट से हटाया गया, जिसके बाद डीवीसी माइथन के डीजीएम सुकुमार नायक के साथ वार्ता हुई। इस बातचीत में भी माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध और मुफ्त बिजली की मांग पर कोई सहमति नहीं बन सकी।

डीवीसी प्रबंधन ने क्या कहा?

डीवीसी प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध के बावजूद स्मार्ट मीटर लगाना सरकारी नियमों के तहत अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली एक व्यावसायिक सेवा है, जिसे मुफ्त में उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

CSR फंड पर भी स्पष्टता

प्रबंधन ने बताया कि उनका CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड केवल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए होता है, न कि बिजली बिल माफी के लिए। इसलिए माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध के तहत उठाई गई मुफ्त बिजली की मांग नियमों के खिलाफ है।

गतिरोध बरकरार

फिलहाल माइथन में स्मार्ट मीटर विरोध और मुफ्त बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों और डीवीसी प्रबंधन के बीच गतिरोध बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह मामला और बढ़ सकता है।

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