धनबाद : झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ के पूर्व घोषित राज्यव्यापी आंदोलन के तहत बुधवार को धनबाद जिला मुख्यालय स्थित रणधीर वर्मा चौक पर पंचायत सचिवों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एकदिवसीय सामूहिक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पंचायत सचिवों ने सरकार की नीतियों और लंबित मांगों को लेकर नाराजगी जताई तथा उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं पंचायती राज निदेशक को संबोधित 9 सूत्री मांग पत्र सौंपा।
धरना को संबोधित करते हुए जिला पंचायत सचिव संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पंचायत सचिव लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में आयोजित राज्य सम्मेलन में समाहरणालय कर्मियों की तर्ज पर पंचायत सचिवों को कालबद्ध उच्चतर ग्रेड पे देने की मांग उठाई गई थी, लेकिन वर्तमान में इसे केवल 2400 रुपये तक ही सीमित रखा गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
संघ ने अपने 9 सूत्री मांग पत्र में पंचायत सचिवों के पदों को पांच श्रेणियों में विभाजित कर ग्रेड पे निर्धारित करने की मांग की है। इसके तहत कनीय पंचायत सचिव के लिए 2400 रुपये, उच्च वर्गीय पंचायत सचिव के लिए 2800 रुपये, वरीय पंचायत सचिव के लिए 4200 रुपये, प्रधान पंचायत सचिव के लिए 4600 रुपये तथा पंचायत सचिव अधीक्षक के लिए 4800 रुपये ग्रेड पे निर्धारित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) के पदों पर वरीयता के आधार पर पदोन्नति का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने, पंचायत सचिवों को मनरेगा एवं रोजगार सेवक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने, सभी पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर ऑपरेटर और रात्रि प्रहरी की स्थायी नियुक्ति करने, गृह जिला में पदस्थापना सुनिश्चित करने तथा समय पर एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) का लाभ देने की भी मांग की गई है।
संघ के नेताओं ने कहा कि पंचायत सचिव ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ हैं और उन पर लगातार अतिरिक्त कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों और सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
पंचायत सचिव संघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
















