धनबाद, 3 अक्टूबर 2026: IIT (ISM) धनबाद ने ACME Cleantech Solutions Pvt. Ltd. और फ्रांस की H2Riveal, Rueil-Malmaison के साथ जियोलॉजिक हाइड्रोजन की संभावनाओं का आकलन और हाइड्रोजन उत्पादन बढ़ाने वाले कैटेलिस्ट विकसित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौता (MoU) किया है। यह समझौता शुरुआती तौर पर 24 महीने के लिए प्रभावी रहेगा।
MoU के दौरान IIT (ISM) के डिप्टी डायरेक्टर एवं डायरेक्टर (करंट ड्यूटी) प्रो. सरत कुमार दास और ACME Cleantech Solutions के चेयरमैन के सलाहकार पद्मश्री डॉ. रबी बस्तिया समेत संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और दोनों कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
हाइड्रोजन क्षमता और रॉक सैंपल पर होगा अध्ययन
समझौते के तहत हाइड्रोजन पोटेंशियल असेसमेंट, रॉक अल्टरेशन स्टडी और स्टिम्युलेटेड हाइड्रोजन प्रोडक्शन के लिए कैटेलिस्ट डेवलपमेंट पर काम किया जाएगा।
शोध के दौरान मिनरलॉजिकल डेटा और भूमिगत परिस्थितियों के आधार पर हाइड्रोजन बनने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा रॉक सैंपल का अध्ययन और हाइड्रोजन उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयुक्त कैटेलिस्ट की पहचान की जाएगी। संभावित क्षेत्रों की भी पहचान की जाएगी, जहां भविष्य में प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा सके।
दो साल से जियोलॉजिक हाइड्रोजन पर काम कर रही टीम
IIT (ISM) की टीम पिछले करीब दो वर्षों से जियोलॉजिक हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध कर रही है। प्रो. सौरभ दत्ता गुप्ता और प्रो. राज किरण के नेतृत्व वाली टीम के पास रिजर्वायर इंजीनियरिंग, एक्सप्लोरेशन जियोफिजिक्स और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग से जुड़ी विशेषज्ञता है।
टीम ने भारत में आयरन ओर डिपॉजिट्स की जियोलॉजिकल हाइड्रोजन प्रॉस्पेक्टिविटी पर शोध पत्र भी प्रकाशित किया है।
ACME देगा रिसर्च के लिए रॉक सैंपल और फंड
MoU के तहत ACME की ओर से रॉक सैंपल और शोध के लिए फंड उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं IIT (ISM) प्राकृतिक हाइड्रोजन, ऑयल एंड नेचुरल गैस और रिजर्वायर मॉडलिंग से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करेगा।
संस्थान हाइड्रोजन रिसोर्स असेसमेंट, उपयुक्त कैटेलिस्ट की पहचान और स्टिम्युलेटेड हाइड्रोजन प्रोडक्शन की व्यवहारिकता पर काम करेगा। फंड जारी होने के बाद इस प्रोजेक्ट को 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह सहयोग अकादमिक विशेषज्ञता, औद्योगिक संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय डीप-टेक क्षमता को एक साथ लाकर प्राकृतिक और जियोलॉजिक हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
















