धनबाद : Anita Agrawal… यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि ममता, समर्पण और सेवा की ऐसी मिसाल है जिसने “मां” शब्द की परिभाषा को और भी विशाल बना दिया है। जहां आमतौर पर मां अपने बच्चों के लिए जीती है, वहीं अनीता अग्रवाल ने अपना पूरा जीवन हजारों दिव्यांग बच्चों के भविष्य को संवारने में समर्पित कर दिया।
Pehla Kadam की सचिव के रूप में उन्होंने न केवल विशेष बच्चों को शिक्षा दी, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीने की राह भी दिखाई। उन्होंने अपनी खुशियां, सपने और व्यक्तिगत जीवन की प्राथमिकताओं को पीछे छोड़ समाज के उन बच्चों को अपनाया, जिन्हें सबसे अधिक सहयोग और संवेदना की आवश्यकता थी।
एक मां की ममता जब अपने परिवार की सीमाओं से आगे बढ़ती है, तब वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। अनीता अग्रवाल इसी प्रेरणा की जीवंत मिसाल हैं। उन्होंने यह साबित किया कि मजबूत इरादों और सच्चे समर्पण के साथ कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।
धनबाद से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज पूरे झारखंड और देश में पहचान बना चुकी है। “पहला कदम” संस्थान के माध्यम से सैकड़ों दिव्यांग बच्चे आज शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
अनीता अग्रवाल का सपना केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। वे भविष्य में एक ऐसे बड़े संस्थान की स्थापना करना चाहती हैं, जहां दिव्यांग बच्चों का समग्र विकास हो सके — शिक्षा, कौशल, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ।
उन्होंने यह साबित कर दिया है कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि वह हर वह इंसान है जो किसी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दे।
सच ही कहा गया है — मां में पूरा ब्रह्मांड समाया होता है, और अनीता अग्रवाल इस सत्य की जीवंत मिसाल हैं।
















