चंदनक्यारी/चास: चास प्रखंड के तुरीडीह गांव में रथी देवी आज भी जर्जर झोपड़ी में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। बांस और टूटी लकड़ियों के सहारे खड़ी झोपड़ी की छत पर प्लास्टिक के टुकड़े बांधकर किसी तरह घर को रहने लायक बनाया गया है।
रथी देवी का एक पैर फाइलेरिया की बीमारी के कारण काफी सूज गया है। बीमारी की वजह से उन्हें चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। पति लखीकांत महतो के निधन के बाद परिवार का सहारा भी उनसे छिन गया। अब बीमारी, आर्थिक तंगी और जर्जर घर के बीच उनका जीवन बेहद मुश्किल परिस्थितियों में गुजर रहा है।
बारिश में टपकता है पानी
बारिश के दौरान झोपड़ी की छत से पानी टपकता है। तेज हवा और खराब मौसम में प्लास्टिक की छत भी सुरक्षा देने में नाकाम रहती है। गर्मी और सर्दी में भी यह कच्चा आशियाना उन्हें मौसम की मार से बचाने में सक्षम नहीं है।
रथी देवी की सबसे बड़ी उम्मीद सरकार से मिलने वाले पक्के आवास को लेकर है। उनका कहना है कि बीमारी के कारण शरीर साथ नहीं देता और अगर पक्का घर मिल जाए तो जिंदगी के इस पड़ाव पर काफी राहत मिलेगी।
सरकारी आवास योजनाओं के लाभ पर सवाल
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना जैसी योजनाएं संचालित हैं। इसके बावजूद रथी देवी जैसी जरूरतमंद महिला के घर तक इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने से जमीनी स्तर पर इनके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, रथी देवी इन योजनाओं के लिए पात्र हैं या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि और प्रशासनिक जांच जरूरी है।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
रथी देवी की स्थिति सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान और जरूरतमंदों तक योजनाओं की पहुंच को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। स्थानीय स्तर पर मांग है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर उनकी पात्रता की जांच करे और यदि वे योजना के लिए योग्य पाई जाती हैं, तो उन्हें जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की पहल की जाए।
फिलहाल रथी देवी की उम्मीद उसी प्लास्टिक की छत से जुड़ी है। उन्हें इंतजार है कि कब सरकारी मदद उनके घर तक पहुंचेगी और प्लास्टिक की छत की जगह पक्के मकान की सुरक्षित छांव मिलेगी।
















